श्रीगोपालमंदिर मार्ग दर्शन
विभिन्न साधनों से ;वायूयान/रेलवे से वाराणसी पहुँच कर षष्ठपीठ श्रीगोपाल मंदिर के 37/89 चौखम्भा, वाराणसी पहुँचने के लिए मार्गदर्शन
लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा ;बाबतपुर /वाराणसी रेलवे स्टेशन कैंट से मैदागिन होते हुए गोलघर कार अथवा टैक्सी द्वारा गोलघर से ग्वालदास साहू लेन पैदल श्रीगोपाल मंदिर पहुँचें।
श्री मुकुन्दगोपाललालौ जयतः
श्री गिरिधर प्रकाशन से प्रकाशित ग्रंथ
भारतीय संस्कृति प्राच्य विघा, दर्शन एवं संस्कृत के दुर्लभ पांडुलिपियों के प्रकाशक
1. गुसाई श्रीविठ्ठलनाथजी तथा चरणाटधाम (अप्राप्य)
2. नित्यस्तोत्र पाठ एवं वैष्णवों के कर्तव्य
3. श0 पी0 धी0 नि0 ली0 108 गो0 श्रीमुरलीधरलालजी महाराजश्री स्मृति ग्रंथ ‘पुष्टिषष्ठपीठ दर्पण’
4. श्री सर्वोत्तमस्तोत्रम् (श्रीगोकुलेषकृत विवृति भावनुवाद सहितम्)
5. पुष्टिमार्ग दीपिका (ऐतिहासिक,सैद्धान्तिक भावात्मक आदि जनकारी-प्रश्नोत्तर शैली में)
6. विट्ठलेश्वर विरचितम् श्रीवल्लभाष्टकम् एवं श्रीस्फुरत्कृष्ण प्रेमामृतम् (श्रीसप्तष्लोकी) विस्तृत भावानुवाद
एवं सरलार्थ सहित
7. लघु स्तोत्रसरित्सागर
8. भ्रमर-गीत – रचयिता अष्टछाप कवि श्रीनंददास
9. चौरासी वैष्णवों की वार्ता (विशिष्ट प्रसंगों का हिन्दी सारांश अप्राप्य)
10. शुद्धाद्धैत मार्तंड (हिन्दी भावानुवाद प्रकाश सहित)
11. श्रीनंददास एवं भ्रमर गीत- एक विचार बिन्दु
12. पुष्टिमार्गीय बैठक-मार्गदर्शिका
13. श्रीगोपीनाथ प्रभुचरण पंचशताब्दी प्राकट्य महोत्सव
14. गिरियागः
15. षष्ठनिधि श्रीमुकुंदरायजी एवं श्रीगोपाललालजी की वार्ता
ग्रन्थ प्राप्ति स्थान
श्रीमुकुन्दगोपाल सेवा संस्थान – श्री गिरिधर प्रकाशन
षष्ठपीठ श्रीगोपाल मंदिर (काशी)
चौखम्भा वाराणसी-221001 (उ0 प्र0)
फोन (0542) 2420252-2437078
गोपाल मंदिर कार्यन्वित श्रीमुकुन्दगोपाल सेवा संस्थान
षष्ठपीठ श्रीगोपाल मन्दिर, चौखम्भा, वाराणसी
मूल आचार्यों की परम्परा में पंचम आचार्य जगदगुरू श्रीमदवल्लभाचार्यचरण के सिद्धांतों द्वारा जन-जन को लाभान्वित करने एवं तत्कालीन दर्शन पर आधारित साहित्य, संगीत, कला का प्रचार एवं तत्सम्बन्धी ग्रंथों के प्रकाशन, ऐतिहासिक स्थलों के जिर्णोद्धार, समाज के दलित, वनवासियों एवं आदिवासियोंके उत्थान के लिए रचनात्मक कार्यो को व्यापक आयाम- प्रदान करने हेतू संस्थान की स्थापना काशीस्थ पुष्टिमार्गीय नि0 लि0 षष्ठपीठाधीश्वर गोस्वामी 108 श्रीमुरलीधरलालजी महाराज की स्मृति में उनके प्राकट्य दिवस पर की गयी थी । संस्था द्वारा निम्नलिखित कार्यक्रम नियमित रूप से चलाये जा रहे है:-
(1) हवेली, संगीत की महिलाओं एवं बच्चो को शिक्षा प्रदान करने हेतू महिला
प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की गयी है जिसमें कीर्तन एवं कत्थक नित्य आदि
आदि की शिक्षा नियमित रूप से दी जा रही है ।
(2) चरणाट धाम की ऐतिहासिक महत्व की बैठक के सुन्दरीकरण का कार्य
‘‘श्री वल्लभ युवक परिषद’’ वाराणसी के सौजन्य से एवं वैष्णव-जनो के सहयोग से निरन्तर चल रहा है बैठक जी के जीर्णोद्धार का कार्य शीघ्र प्रारम्भ होने जा रहा है ।
(3) षष्ठपीठ श्रीगोपाल मन्दिर के सत्संग कक्ष में प्रत्येक एकादशी पर पुज्यपाद
महाराज श्री का प्रवचन आयोजित होता है जिसमें काफी संख्या में श्रोताजन उपस्थित हो कर प्रवचन/ सत्संग का लाभ लेते है।
(4) वर्ष पर्यन्त समय समय पर भारतीय दर्शन के आचार्यो, मनीशियो की जयन्ती, विद्धत् गोष्ठी आदि का आयोजन भी होता रहता है । पुरुषोत्तम मास एवं अन्य विविध आयोजनो में सस्थान का पूर्ण सहयोग मन्दिर की व्यवस्था को प्राप्त होता है ।
(5) लोक कल्याण की भावना से प्रेरित होकर संस्थान के तत्वावधान में श्री विठ्ठलेष आरोग्य केन्द्र चल रहा है । इस केन्द्र में प्रतिदिन होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के द्वारा रोगो के उपचारकी व्यवस्था नियमित रूप से निःशुल्क की जा रही है ।
(6) भारतीय दर्शन से सम्बन्धित ग्रन्थों के प्रकाशन हेतु श्री गिरिधर प्रकाशन की स्थापना की गयी जिसके द्वारा अनेक ग्रन्थों का प्रकाशन हो चुका है ।
(7) आध्यात्मिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक ग्रन्थों के अध्ययन में लोगों की रूचि बढाने हेतु मंदिर के प्रागंण में ‘‘मुरलीधर पुस्तकालय एवं वाचनालय’’ की स्थापना की गयी है । जिसमें अनेकानेक विषयों की पुस्तकों के साथ संस्कृत साहित्य के दुर्लभ ग्रन्थ भी उपलब्ध है, जो शोधकर्ता विघार्थियों एवं विद्धत्जनों के लिए अत्यन्त उपयोगी है । पुस्तकायल सुविधा प्रतिदिन सोमवार से शनिवार को सायं 5 से 7 बजे एवं रविवार को प्रातः 8 से 10 बजे तक उपलब्ध रहती है
(8) बालक/बालिकाओं को सुसंस्कारित करने हेतु संस्थान द्वारा भारतीय दर्शन,क्षेत्रिय भाषाओं एवं हस्तकला प्रबन्धन के शिक्षण का कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष ग्रीष्मकालीन अवकाष के समय तथा वर्ष के प्रत्येक रविवार को निरन्तर चल रहा है ।
(9) अडै़ल स्थित बैठक जी के मुख्य परिसर का जीर्णोद्धार मस्कट के वैष्णव समाज के सहयोग से पूर्ण हो चुका है । अब वहाँ 20 कमरोंवाले अतिथि भवन का निर्माण प्रस्तावित है।